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शुक्रवार, 30 मार्च 2012

’गुफ्तगू’ के परिशिष्ट कालम में शामिल होने के लिए


हिन्दुस्तानी साहित्य की त्रैमासिक पत्रिका ‘गुफ्तगू’ के हर अंक में किसी एक शायर अथवा कवि को सहयोग आधार पर परिशिष्ट के रूप शामिल किया जाता है। जिसके अंतर्गत कवि को 32 पेज दिया जाता है और कवर पेज पर भी उसी कवि की तस्वीर होती है। अंदर के 32 पेजों पर शायर का परिचय, उसकी ग़ज़लें,कविताएं और दो-तीन लोगों का समीक्षात्मक लेख शामिल किया जाता है, समीक्षात्मक लेख कवि की रचनाओं पर आधारित होता है। फिलहाल गुफ्तगू की छह हजार प्रतियां छप रही हैं,  जो तमाक अप्रवासी भारतीयों के पास भी जा रही हैं। परिशिष्ट कालम में शामिल होने वाले कवि को उस अंक की दो सौ प्रतियां प्रदान की जाती है, और यदि कवि की इच्छा हो तो इलाहाबाद में उसे बुलाकर उस अंक का विमोचन समारोह भी किया जाता है। अब तक पद्मश्री बेकल उत्साही, कैलाश गौतम, नवाब शाहाबादी, मक़बूल हुसैन जायसी, सुनील दानिश, धनंजय कुमार, अक्षय गोजा, अरमान ग़ाज़ीपुरी, कृष्ण कुमार यादव, हसन सिवानी, किशन स्वरूप, नाशाद औरंगाबादी, अजय अज्ञात, मंजूर बाकराबादी, मोनिका नामदेव, भगवान स्वरूप चैतन्य, राज पटनवी और सुरेन्द्र नाथ नूतन के एक-एक परिशिष्ट प्रकाशित हो चुके हैं, जबकि फरमूद इलाहाबादी, जलाल फूलपुरी और सुरेश चंद्र श्रीवास्तव के दो-दो परिशिष्ट प्रकाशित हुए हैं।
परिशिष्ट में शामिल होने के लिए मोबाइल नंबर 9889316790 पर बात करें।

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